हरेला पर्व पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार का वृहद वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

अनिल कश्यप
रूडकी /हरिद्वार उत्तराखण्ड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार द्वारा उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय नैनीताल एवं उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार वन विभाग हरिद्वार के सहयोग से जनपदभर में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार नरेन्द्र दत्त ने की।
जिला न्यायालय परिसर हरिद्वार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश ने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विरासत हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। प्रत्येक नागरिक को अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

इस अवसर पर हरिद्वार के साथ-साथ रूड़की एवं लक्सर स्थित बाह्य न्यायालयों में भी न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्रों तथा अन्य सहयोगियों द्वारा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया।

कार्यक्रम में जिला न्यायालय हरिद्वार के सभी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सिविल जज (सीनियर डिवीजन), मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अन्य न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी, एलएडीसी अधिवक्ता, रीटेनर एवं पैनल अधिवक्ता, अधिकार मित्र, लॉ इंटर्न सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सिमरनजीत कौर ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

इसी क्रम में वन विभाग हरिद्वार द्वारा नगर वन बैरागी कैंप, कनखल में आयोजित हरेला महोत्सव में भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर ने डिप्टी एलएडीसी रमन कुमार सैनी, लॉ इंटर्न एवं अधिकार मित्रों के साथ सहभागिता करते हुए पौधारोपण किया। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) स्पनिल अनिरुद्ध, एसडीओ पूनम कैंथोला तथा वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम ने वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हुए हरेला पर्व को जनभागीदारी के साथ मनाने का आह्वान किया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।